कांग्रेस के प्रेम वाली पोटली में गालियों की भरमार, मौत का सौदागर से डंडा मारने तक...


एल.एस.न्यूज नेटवर्क, नयी दिल्ली। राहुल गांधी अपने बयानों की वजह से लगातार निशाने पर आ जाते हैं। नतीजा ये होता है कि जो मुद्दे वो उठाना चाहते हैं वे तो पीछे छूट जाते हैं और उनकी बातों का मजाक बन जाता है। विवादित बयानों से नुकसान भी सबसे ज्यादा राहुल गांधी का ही होता रहा है या फिर कहें कि कांग्रेस को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। लेकिन विवादित बयान देने की आदत राहुल को विरासत में मिली है। लगातार अपने रसातल की ओर जा रही कांग्रेस लोगों के बीच जो मुद्दे वो उठाना चाहती है और लोगों के बीच जाकर जिन मुद्दों पर नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करना चाहती है, उनकी जगह चर्चा उनके राजनीतिक रूप से बचकाने बयानों पर होने लगती है। सोनिया से लेकर राहुल तक नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते रहे हैं और ये निशाना कब राजनीतिक से व्यक्तिगत हो जाता है इसका अंदाजा न ही कांग्रेस पार्टी को पता चल पाता है और न ही राहुल और सोनिया को।



 


साल 2007 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को 'मौत का सौदागर' कहा था। उस वक्त मोदी गुजरात के सीएम थे। सोनिया गांधी ने नवसारी में चुनावी रैली में कहा था, 'गुजरात की सरकार चलाने वाले झूठे, बेईमान, मौत के सौदागर हैं।' नरेंद्र मोदी ने सोनिया के इन आरोपों का चुनावी रैली में ही जवाब दिया था कि मौत के सौदागर वो हैं जो संसद पर हमला किए। जब चुनाव परिणाम सामने आए तो सोनिया के इस बयान का कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ और राज्य में बीजेपी की फिर से सरकार बनी। इस चुनाव में 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में बीजेपी को 117 सीटें मिलीं ज‍बकि कांग्रेस 59 सीटें ही हासिल कर सकी।

 

साल 2014 जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के बाद देश की राजनीति में अपना डंका बजाने निकले। लोकसभा चुनाव का दौर था और इस बार मोदी सोनिया की बजाय कांग्रेस के उस वक्त के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निशाने पर रहे। राहुल ने मोदी पर जहर की खेती करने का आरोप लगाया। जिसके बाद इस बयान से मोदी के पक्ष में जबरदस्त लहर बनी और केंद्र में बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी। 2014 के आम चुनाव में बीजेपी को अकेले 282 सीटें हासिल हुईं जबकि पिछले 10 साल से देश पर राज कर रही कांग्रेस 44 सीटों तक सिमट गई।

 

 

साल बदलते रहे और कांग्रेस इसी तरह मोदी पर तीखे हमले करते रही। इसके बावजूद कि वो जनता द्वारा चुने गए देश के प्रधानमंत्री हो गए। कांग्रेस के बयानों का आलम ये हो गया कि उसके पूर्व मंत्री ने तो पाकिस्तान में जाकर नरेंद्र मोदी को हटाने की बात तक कह दी। 

 

 

इसके बाद तो जैसे ये आम हो गया और गंदी नाली का कीड़ा, पागल कुत्ता, भस्मासुर, वायरस और दाऊद इब्राहिम की संज्ञा भी समय-समय पर कांग्रेस नेताओं और प्रवक्ताओं की तरफ से दी जाती रहीं। आलम ये हो गया कि सेना के शौर्य को भी मोदी के प्रति नफरत से जोड़ दिया गया। किसान यात्रा की समापन रैली में राहुल ने कह दिय़ा कि , 'हमारे जवानों ने जम्मू-कश्मीर में अपना खून दिया है। उन्होंने हिन्दुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं और उनके खून के पीछे आप (मोदी) छिपे हैं। उनकी आप दलाली कर रहे हो, ये गलत है।

 

 

झारखंड चुनाव में राहुल गांधी के 'रेप इन इंडिया' वाले बयान पर संसद में भी और सड़क पर भी खूब हंगामा हुआ था। जिसके बाद जब रामलीला मैदान में कांग्रेस केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए रैली की तो उसके बाद चर्चा में विरोध के टॉपिक सीएए और एनआरसी पीछे रह गये और बहस राहुल गांधी के बयान पर होने लगी। तब राहुल गांधी ने कहा था - 'मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं राहुल गांधी है।'

 

 

दिल्ली चुनाव में भी कांग्रेस के कैंपेन में राहुल गांधी ने ठीक वैसा ही काम किया जैसा कि वो और कांग्रेस के अन्य नेता अक्सर करते आए हैं। दिल्ली में राहुल गांधी निकले तो थे कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट दिलाने के लिए प्रचार करने, लेकिन जल्दी ही अपने मूल मुद्दे पर आ गये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेरोजगारी मुद्दे पर जमकर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये जो नरेंद्र मोदी भाषण दे रहा है, 6 महीने बाद ये घर से बाहर नहीं निकल पाएगा। हिंदुस्तान के युवा इसको ऐसा डंडा मारेंगे, इसको समझा देंगे कि हिंदुस्तान के युवा को रोजगार दिए बिना ये देश आगे नहीं बढ़ सकता। 'राहुल गांधी का सबसे पसंदीदा टॉपिक इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी न किसी बहाने टारगेट पर लेना ही रहता है और अब तो वो पूरी तरह से तू-तड़ाक पर उतर गए हैं। जिसे सुनने के बाद आम जनता को भी लगेगा कि वो एक चुने हुए सांसद और देश की सबसे पुरानी पार्टी के भूतपूर्व हो चुके मुखिया से रूबरू हो रहे हैं या नुक्कड़ पर खड़े किसी सड़क छाप टपोरी से। क्योंकि कम से कम एक पार्लियामेंटेरियन से इस तरह की भाषाई शैली की उम्मीद तो बिल्कुल ही नहीं की जा सकती है।