बद्रीनाथजी के दर्शनों के बाद जरूर घूमिये आसपास के इन इलाकों में


उत्तराखंड को देवों की भूमि भी कहा जाता है। इस राज्य में ख्यातिप्राप्त तीर्थस्थल तो हैं ही साथ ही इस राज्य की प्राकृतिक सौंदर्य भी देखते ही बनता है। इस राज्य की खूबसूरती का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि उत्तराखंड की प्रमुख आय का स्त्रोत पर्यटन ही है। खूबसूरत स्थलों और तीर्थस्थलों का जिक्र आए और बद्रीनाथ का उल्लेख न हो। ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि हिन्दुओं के लिए बद्रीनाथ आस्था का प्राचीन केन्द्र है। इस तीर्थस्थल की खासियत यह है कि यह न सिर्फ अपनी महिमा बल्कि अपने अलौकिक सौंदर्य के कारण भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।



 


यहां आने पर आप देखेंगे कि किस प्रकार सैलानी आसमान की ऊंचाइयों को छूते पहाड़ तथा नर व नारायण की गोद में स्थित इस जगह पर सुनहरे शिखरों व घाटियों की सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यहां पर अलकनंदा नदी की घाटी के बीच में बहते हुए कलकल करते जल की आवाज सुनकर आपको एक मधुर संगीत सुनने-सा आभास होगा। यहां पर पहाड़ों की आड़ में विशाल मंदिर की स्थापत्य कला तो देखने योग्य है। लगभग 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बद्रीनाथ धाम मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर के निकट ही गर्म जल के सोते भी हैं। इन सोतों में स्नान करने का अपना अलग ही मजा है। इन सोतों के जल की खास बात यह है कि यह आपकी थकान को क्षण भर में दूर कर देता है।

 

पूर्व में भले ही बद्रीनाथ की यात्रा कठिन हुआ करती थी लेकिन अब यहां पर काफी विकास हुआ है और यात्रियों के लिए अनेक सुविधाएं प्रशासन की ओर से मुहैया कराई गई हैं। अब सड़क बन जाने से यहां की यात्रा बहुत ही सुविधाजनक हो गई है। आप जब यहां आए ही हैं तो यहां के दर्शनीय स्थलों को देखना मत भूलिए। बद्रीनाथ धाम के आसपास कई खूबसूरत झीलें और मनोहारी ताल भी मौजूद हैं। जिनमें आप नौकायन का लुत्फ भी उठा सकते हैं।

 

देखने लायक सर्वश्रेष्ठ स्थलों में तप्तकुंड, नीलकंठ, माणाग्राम व भीमपुल आदि प्रमुख हैं। बद्रीनाथ की यात्रा पर आने से पहले यात्रियों को यह देखना चाहिए कि वह किस मौसम में यहां जाना चाह रहे हैं। यदि आप मई माह में यहां आ रहे हैं तो आपको भारी ऊनी वस्त्र लाने चाहिए जबकि यदि आप जून से सितंबर माह के बीच में यहां आने का मन बनाते हैं तो आपको हल्के ऊनी वस्त्र लेकर आने चाहिए। यदि आप अक्टूबर व नवंबर माह में यहां जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं तो अपने साथ भारी ऊनी वस्त्र ही लेकर जाएं।

 

यहां तक आने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार, ऋषिकेश व कोटद्वार पड़ते हैं। वैसे तो दिल्ली से हरिद्वार, ऋषिकेश व कोटद्वार तथा देहरादून के लिए परिवहन निगम की नियमित बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार व कोटद्वार तथा देहरादून उत्तरी भारत के प्रमुख नगरों से सड़क मार्गों द्वारा जुड़े हुए हैं। ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक का पूरा रास्ता पहाड़ी है। यह मार्ग गंगा और अलकनंदा के किनारे होता हुआ जा रहा है। वैसे यदि आप ऋषिकेश तक ट्रेन से ही आ गए हैं तो आप यहां से बस या टैक्सी लेकर आसानी से शाम तक बद्रीनाथ तक पहुंच सकते हैं।

 

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